दम तोडते हुये उत्तर प्रदेश के कुश्ती अखाडे

आप ने कभी सोचा है दिल्ली पंजाव, हरियाणा के पहलवान ही देश का  नाम रोशन क्यों कर रहे हैं ? हा वहा की सरकारें  पहलवानों को हर सुविधा दे रही है इस लिये लेकिन खेल विभाग के पास  उत्तर प्रदेश में अपना एक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का अखाड़ा नहीं है। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के कुछ अखाड़े हैं लेकिन उनमें वही खिलाड़ी जा सकते हैं, जिनका राष्ट्रीय कैंप में चयन हुआ हो।
कुश्ती के गुरू खलीफाओं का  कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के अखाड़े हर शहर या गॉव, मै नहीं बनाए जा सकते लेकिन जिलों मै बनें तो ही कुछ फायदा होगा पहलवानो को
गांवों में मिट्टी के अखाड़े चल रहे हैं लेकिन ज्यदातर खुल्ले आशमान के नीचे ,बिक्रम, पहलवान  फिरोजाबाद से है एक मिटटी ,मै अच्छा लडता है वो भी प्रदेश सरकार की अवहेलना झेल रहा है अपने ही गॉव अधमपुर मै संसाधन न होने से दुखी है
उत्तर प्रदेश मैं कई गुरू खलीपा कुश्ती के अखाड़े चला रहे हैं और देश को पहलवान दे रहे हैं लेकिन यह सब मिट्टी के हैं। इनमें ज्यादा सुविधा नहीं है। मिट्टी के अखाड़े है जिस में कुश्ती प्रैक्टिस करने और दंड लगाने के अलावा कोई प्रैक्टिस नहीं है लेकिन आज जिस तरह से कुश्ती का स्टाइल बड रहा है उसी तरह प्रैक्टिस करने की सुविधा चाहिए होगी।
उत्तर प्रदेश मै कई सरकारी अखाड़े चल रहे हैं, उनमें भी सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। कई खेल विभाग के अखाड़ों से बेहतर गांव में चल रहे अखाड़े है। पॉच वर्ष पहले उत्तर प्रदेश,व खेल विभाग ने प्लान किया था कि अच्छे अखाड़ों में सुविधा व सहायता दी जाएगी, लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश मैं अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर के अखाड़े बनाए जाएंगे तो दूसरे देशों के पहलवानों को धूल चटा सकते है यह बेहद जरूरी हो गया कि अखाड़ों की स्थिति सुधारी जाए। 
   *** स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत ***
                      जय. हिंन्द

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