शान ऐ फिरोजाबाद
चिड़ियों के घोंसलों में कभी बाज नहीं होते ,
कायर कमजोरों के कभी राज नहीं होते ,
जिनमें पुरुषार्थ नहीं, उनके सर पे कभी ताज नहीं होते
दंगल, की दीवानगी कुछ इस कदर लोगों का एक बडा गोल घेरा घेरे के बीच मै पहलवान , एक दुशमन की तरह एक दूसरे पर वार करते है सिर्फ दुशमनी उस घेरे के अंन्दर तक ही सीमित रहती है बाहर देखो तो पहलवानो की एक अलग ही दुनियॉ है चाहे कहीं का हो पहलवान तो पहलवान होता है पहलवान की कोई जाति नही होती
कायर कमजोरों के कभी राज नहीं होते ,
जिनमें पुरुषार्थ नहीं, उनके सर पे कभी ताज नहीं होते
दंगल, की दीवानगी कुछ इस कदर लोगों का एक बडा गोल घेरा घेरे के बीच मै पहलवान , एक दुशमन की तरह एक दूसरे पर वार करते है सिर्फ दुशमनी उस घेरे के अंन्दर तक ही सीमित रहती है बाहर देखो तो पहलवानो की एक अलग ही दुनियॉ है चाहे कहीं का हो पहलवान तो पहलवान होता है पहलवान की कोई जाति नही होती

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Yas